एसबी शाह

चीन के सबसे करीबी कहे जाने वाले देशों में पहला नाम पाकिस्तानका आता है । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा चीन केOne Belt One Road  Project शुरुआत से ही समर्थन  किया है । पाकिस्तान मे निर्मित (China Park Economic coridoor) OBOR परियोनजा का एक हिस्सा है । इस परियोजना के अंतर्गत पाकिस्तान के कराची , से पेशावर तक रेल लाइन का आधुनिकरण कर इस रेल लाइन को चीन के दक्षिणी जिनजियांग रेलवे से जोडा जाएगा । इस परियोजना के अंतर्गत चीन द्वारा पाकिस्तान के ग्वादर एवं करांची बंदरगाह को विकसित किया जाएगा । चीन द्वारा 1100 KM का सडक कराँची से लाहौर तक बनाने का प्रस्ताव है ।

     चीन द्वारा CPEC परियोजना के तहत गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्यक्रम भी चल रहा है । चीन द्वारा निर्मित विभिन्न परियोजना दिखने मे तो लुभावने है । परंतु इन परियोजनाओ मे खर्च होनेवाली राशि के कारण पाकिस्तान चीन के ऋण जाल मे फँसकर अपनी देश की अभंव्यवस्था को बर्बाद करने की और अग्तसर है । CPEC परियोजना के तहत पाकिस्तान अबतक चीन से 72    बिलियन  डाँलर ऋण ले चुका है । फलस्वरुप पाकिस्तान का विदेशी ऋण बढकर GDP के 69  प्रतिशत हो चुका है ।

 पिछले साल ही पाकिस्तान अपनी आर्थिक संकट से निकलने के लिए साउदी अरब से $6  बिलियन डाँलर सहाय राशी की माँग की है । पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमारन खान पिछले वर्ष July, 2018  काे  CPEC पर  दाेवारा विचार के लिए चीन गए थे । तब भी प्रधानमंत्री द्वारा 2 बिलियन डाँलर की सहायता राशी की माँग चीन से की थी ।

     पाकिस्तान सरकार के लिए CPEC परियोजना गले की हडी बन चुकी है हाल मे ही पाकिस्तान द्वारा विश्व बैंक से भी सहायता राशी की माँग कर चुकी है पाकिस्तान की सामाचार ऐजेसियो द्वारा लगातार चेतावनी दी जा रही है । क आने वाले समय मे पाकिस्तान चीन के उपनिवेश के रुपा मे परिवर्तित न हो जाए । पाकिस्तान पूर्व में 100  साल से अधिक तक ब्रिटिस उपनिवेश के रुप मे रह चुका है इससे पाकिस्तान को सीख लेनी चाहिए ।

    नेपाल हमारी मातृभूमि है जोकि प्राकृतिक संसाधनो से परिपूर्ण है । नेपाल मे भी चीन भारी मात्रा में निवेश कर रही है विभिन्न परियोजनाओ के निर्माणहेतु जैसे की रेल लाइन की जाल चीन से नेपाल के विभिन्नो प्रदेशो जैसे की काठमाण्डु, पोखरा, लुम्बनी को जोडने का कार्य किया जा रहा है । पिछले वर्ष जुन 2018 को नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा चीन गए एवं उनके द्वारा 2.4 बिलियन के सम्झौता पत्र पर हस्ताक्षर किया गया । जिसमे आधारभूत संरचना, ऊर्जा और 2015  मे नेपाल मे भुकंप से क्षतिग्रस्त संरचना को पूर्व निर्माण किया जाएगा । सबसे बढी परियोजना हिमालय के बीच से चीन एवं नेपाल के बीच रेल लाइन विछाने का परियोजना है । जिसकी लागत 2.25 बिलियन डाँलर या इससे अधिक हो सकती है इस परियोनजा का 98.5% प्रतिशत रेल लाइन, सुरंगा पुल हिमालय के अंदर से गुजरेगी जो निर्माण के दृष्टि से आसान प्रतीत नही होता है । अगर यह परियोजना सफल पूर्वक बन जाति है तो क्या इसकी उपयोगि ता ल‌‌बे  समय तक हो पाएगी । क्योकि हिमालय अस्भिर है । एवं भूकंप क्षेत्र मे आता है जहा झस्खलन एवं न्यूनतम तापमान होता है । एवं इस परियोजना के नियमित संचालन हेतु नेपाल एवं चीन सरकार द्वारा रखसखता है आभधिक खर्च बढेगी । जो इसकी उपयोगिता पर नकारात्मक प्रभाव दर्शाती है ।

     श्रीलंका का हंसनटोल वोर्ट चीन द्वारा भारी निवेश कर बनाया गया । परंतु वास्तविकता मे उसकी उपयोगिता श्रीलंका नही कर पाया जिससे श्रीलंका चीन के भारी ऋण जाल मे फँस गया । फलस्वरुप श्रीलंका को हमबनटाेटा पाेर्ट बंदरगाह चीन को 99 साल के लिए लीज पर मजबुरी मे देना पडा क्योकि श्रीलंका द्वारा चीन के भारी कर्ज को लौटा पाना संभव नही हो पाया ।

     नेपाल को श्रीलंका एवं पाकिस्तान जैसो देशो की स्थिति को देखते हुए सीख लेना चाहिए ऐसा न होकि दुसरे देशो की तरह नेपाल भी चीन के ऋण जाल मे फँस नजाए । नेपाल सरकार विदेशी निवेश को अपने शाह मे लाए लेकिन उन विदेशी निवेशो की सभी पहलुओ को अच्छी तरह जान ले ।

     पिछले कुछ वर्षो में चीन द्वारा नेपाल में 29 बिलियन डाँलर से भी ज्यादा छोटे बडे परियोजनाओ मे निवेश कर चुकी है । चीन द्वारा नेपालको इतनी भारी मात्रा मे दिया गया ऋण नेपाल जैसे छोटी अर्थव्यवस्था वाला देश इस ऋणको चुका पाना संभव हो पाएगा ।

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