एसबी साह

चाइना को सबसे बडा महत्वाकांक्षी सजावटी प्रोजेक्ट वन वेल्ट वन रोड पर होने वाला मिटींग अप्रैल २०१९ को समापन हुवा है । जहाँ बहुत सारे देशों ने हिस्सा लिया था । लेकिन इस बार इंडिया के साथ साथ श्रीलंका, जापान, नार्थ कोरिया, साउथ कोरिया और भी बहुत सा देशों ने हिस्सा नही लिया है । दुसरी तरफ पाकिस्तान जो कि चाइनाका सबसे बडा मित्र माना जाता है, वह भी इस बार संभलकर अपना कदम बढाते नजर आया ।
२०१७ में जब इस परियोजना की पहली मिटींग हुई थी । ऐसा भी देखा गया कि जो देश वन वेल्ट वन रोड भे शामिल हुए, उन देशों ने भी इस परियोजना का निन्दा किया है । उन देशों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट देखने मे तो काफि लुभावना है लेकिन इसमें काफी छुपे हुए पहलु है जो दिखाई नहीं पडता है ।
श्रीलंका २०१७ मे इस प्रोजेक्ट मे शामिल हुआ था लेकिन चाइना का ऋण जाल में फँस कर श्रीलंका को अपना एक पार्ट हम्वन टोटा चाइना के निजी कंपनी को ९९ साल के लीज पर देना पडा ।
दुसरी तरफ मालदीव २०१७ मे इस प्रोजेक्ट मे शामिल हुआ था तबसे १.३ बिलियन डलर के कर्ज के जाल में फँस चुका है । लेकिन इब्राहिम मोहम्मद सोलीह जब सत्ते मे आए तो वो भी अपना कदम फुक फुक कर रखने लगे । इसी तरह मलेशिया भी चीन के वन वेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट के तहत चाइना के ऋण जाल मे आधा डुब चुका था । महाथिर विन मुहम्मद जव मलेशिया के सत्ते मे आए तब उन्होंने चाइना के दो बडे परियोजना को बन्द कर दिया । इसका कारण स्वरुप बताया कि इस प्रोजेक्ट का कुल लागत था २२ बिलियम युएस डलर, जिसके बजह से उनके देश कर्ज जाल में डुब जाएगी ।
इसलिए, उनके देश को इस प्रोजेक्ट का नतो आवश्यकता है न इसकी जरुरत है । पाकिस्तान इस बार मिटिंग में शामिल तो हुए पर सबकुछ ठीक नही लग रहा था । पाकिस्तान ने Diamer Basha डैम प्रोजेक्ट चाइना के हाथ मे निर्माण करने के लिए नही दिया । इसके बजह से चाइना सरकार ने पाकिस्तान की आलोचना भी कि ।
नेपाल सरकार ने पहलीवार वन वेल्ट वन रोड में हिस्सा लिया है । पिछली साल जुन २०१८ मे प्रधानमन्त्री के.पि. शर्मा ओली चाइना का दौरा किएथे । एक समझौते के तहत चीन के वार्डर से काठमाण्डु तक ७२.२५ किलोमिटर रेलवे लाइन पुरा करने का नेपाल और चाइना के बीच एम .ओ. यु पर हस्ताक्षर हुआ था । और यह लग रहा था कि शायद चाइना मे हुए वन वेल्ट वन रोड मिटिंग में नेपाल इस प्रोजेक्ट पर चाइना के साथ एग्रीमेंट कर ले । पर ऐसा हुआ नहीं । नेपाल हिमालय के गोद में बसा हुआ एक खुबसुरत देश है । हिमालय बे बिच से जो रेलवे प्रोजेक्ट नेपाल चाइना के विच होनेवाली है उससे  हिमालय के पर्यावरण को ज्यादा नुकसान हो सकता है । इस हिमालय में अस्थिरता भी बढ सकती है । वैसै ही हिमालय काफी अस्थिर है । आए दिन यहाँ भुकम्प, भुस्खलन होती रहती है । यह प्रोजेक्ट वैसे तो आसान नहीं लगती है फिर भी अगर यह रेलवे लाइन बनती है तो ९९.५ प्रतिशत रेल लाइन ब्रिज और टनेल से होते हुए गुजरेगा । यानि हिमालय में काफी ज्यादा पौमाने पर ब्रिज और टनेल कि निर्माण करना होगा जिससे हिमालय में तापमान बढने की संभावनाएँ बढ जाएगी । यह बताया जाता है कि इस रेलवें लाइन कि वजह से नेपाल में टयूरिज्म काफी बढ जाएगा ।

लगभग २.५ मिलियम टुरिस्ट हर साल नेपाल आएगे पर इसके साथ हिमालय के इनभेशमेन्ट पर काफि बुरा असर पडेगा । दुसरी तरफ नेपाल काफी छोटा सा देश है । इतने ज्यादा टयुरिस्ट आने से उस देश के राजनीति मे भी दुसरे देश की प्रभाव बड जाएगी ।
जहाँ दुनिया आज पर्यावरण को बचाने के लिए एक मंच पर शामिल हो रहे हैं । वहाँ नेपाल को अपनी इस फैसला लेने के लिए गंभिरतासे सोचना चाहिए था । आने वाले अगली पिढी के लिए नेपाल क्या छोडकर जाएगी इसके लिए नेपाल सरकार को आज से ही सोचना चाहिए ।
दुसरी और चाइना बाकी देशों कि तरह नेपाल में भी काफी निवेश कर रही है । श्रीलंका, मलेशिया, मालदीप, पाकिस्तान जैसे देशों कि तरह नेपाल भी चाइना के ऋण जाल मे फँस न जाए, इसके लिए भी सोचना चाहिए । जहाँ पाकिस्तान जैसा मित्र देश भी वन वेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट से बचता नजर आ रहा है वहाँ नेपाल सरकार को भी अपनी कदम सोच समझकर लेना चाहिए ।

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