नेपाल मे विगत लम्बि कालखण्ड से हि पुरुष और महिला बिच लैङ्गिक विभेद कि अवस्था कायम रहा है।यहाँ कि अधिकांश वासिन्दाएे संस्कृति एंव परम्परा से प्रभावित है।यहाँ कि सामाजिक एंव राजनीति संरचना मे पितृसत्तात्मक रहा है।इसिलिए सामाजिक तौर से महिलाओं के घर कि अन्दर के काम मे सिमित रखनेकि और शारिरिक एंव मानसिक रुप से कमजोर बनाया रखने कि परम्परा बन गया है।राजनीतिक रुप मे महिलाको उप बनाकर चुप करने कि सिस्टम बनाया है।
नेपाल मे समाज से हि राजनीति शुरु होता है और राजनीति से हि समाजिक व्यवस्था सन्चालन होता है।यहाँ समाज और राजनीति एक सिक्के का दो पार्ट जैसा है।इसिलिए सामाजिक जीवन और राजनीतिक जिवनको मे चर्चा करना चाहति हु ।
सामाजिक जीवन
नेपाल कि संविधान २०७२ का भाग -३ धारा ३८ मौलिक हक मे महिला के हक का व्यवस्था किया है।जिस पर हर महिलाको समान वंशिय हक,सुरक्षित मातृत्व और प्रजनन स्वास्थय हिंसा और शोषण न होने का,महिला शिक्षा स्वास्थय ,रोजगार ,दौलतमे समान हक,सामाजिक सुरक्षा जैसे बहुत अधिकार का उल्लेख किया है ।भाग -२७ धारा २५२,२५३,२५४ मे महिला के रास्ट्रिय विकास के मुल प्रवाह मे समाहित करने के लिए राज्य कि सभि निकाय पर समानुपातिक सहभागीता सुनिश्चित,लैङ्गिक समानता ,महिला सशक्तीकरण,महिला हिंसा और सामाजिक वुरा रिवाजो से पिडित कि कानुनी व्यवस्था जैसे बात उल्लेख किया है।उल्लेखित संविधान व्यवस्थाओं को देखे तो नेपाल के महिलाओं के सामाजिक जीवन अति सरल ,सुरक्षित ,सुखि और समस्याओं से दुर जैसा लगता है ।लेकिन महिला के लिए शब्द और कागज मे हि कानुन बना है ।लेकिन महिला के लिए शब्द और कागज मे हि कानुन बना है ।यहाँ कि समाजमे लैङ्गिक विभेद ने जमिन पकड लि है ।सामाजिक जीवन के परिवेश मे दहेज,घुघट प्रथा,डायन कि आरोप,बेटा और बेटि मे विभेद जैसा रिवाज ने गगन चुम लि है।
बेटा और बेटि मे सन्तान कि जन्म से पुर्व मां कि पेट मे भुर्ण अवस्था मे रहते हि विभेद किया जाता है।बेटि का कम उम्र मे शादि करा के मां बाप अपने जिम्मेवारी से मुक्त होने का यहसास करता है।यहाँ ऐसा समाज भि मौजुद है जो महिला को बच्चा उत्पादन करने बालि फैक्ट्रि समझता है।लैङ्गिक हिंसा ,घर मे हिंसा ,यौन शोषण,बलात्कार ,देह व्यापार जैसा यौन से जुडे दर्द महिलाओं को सहना पडता है।
निर्मला पन्त जैसि १५ साल कि किशोरी बलात्कार होना और अपराध करनेवाले बलात्कारि को सरकार कि और से छुपाना यहाँ कि आम बात हो गयि है ।नेपाल लकडाउन का पिरियड मे मधेस मे उर्मिला ऋषिदेव और ८ दलितों का हत्या कि गयि ।लेकिन सरकार पिडित को न्याय दिलाने मे नाकाम रहा ।मधेस मे दहेज कम होने कि बजह और वहाने मे बहुत सारे महिला मारि जाति है।समाज मे हर पक्षमे महिला होकर महिला से लडना पडता है।अभि भि समाज मे पुरुष का कहने पर महिला कि जीवन चल रहा है।
शास्त्र के अनुसार महिला को अर्धङागिनि कहा जाता है लेकिन व्यवहारमे नोकरानि के तरह है ।किसि भि वहानो मे महिला पर एसिड छिडकना,मारना ,पिटना ,गालि बकना ,डर दिखाना ,झुटि आरोप लगाना ,भावनाओं पर खेलना और चोट पहुँचाना ,यह सारे बात होता है।अगर यह घटना किसि को बताया तो उस घर मे महिला का जीवन नरक बनाया जाता है।मधेसी समुदाय मे कुवारि महिला को खुलि रुप मे घुम्ने का स्वतन्त्रता नहि होता है।जिस कारण से विचार ,कार्यदक्षता,सीप ,लक्ष्य सभि कुण्ठित और गुमसुदा होता है।समाज मे बेटा जन्म को स्वर्ग के दरवाजा खुलने का मान्यता दि जाति है ,मुस्लिम समुदाय मे बुर्का पहनने औेर बेटि जन्म को अभिशाप मानने कि प्रथा से महिला सामाजिक तौर से शोषित होने का पृष्ठि करता है।
राजनीतिक जीवन
नेपाल कि राजनीति मे महिलाओं का पहुँच न्यूनस्तर रहा है।वि.स.२००७ का परिवर्तन के साथसाथ नेपाल के राजनीतिमे महिला सक्रिय हुई है।वि.स.२०१५ का संसदिय आम चुनाव मे कुल १०९ सिट मे १ सिट मे द्वारिका देवि ठकुरानि विजयि हुयि थि ।नेपाल मे वि.स.२००७ से पहले २००७ -२०१७,२०१७-२०४६,२०४६,२०६३,२०६३-२०७२और २०७२ से आज तक कि कालखण्ड मे महिला राजनीति का गोल्डेन पिरियड माना जाता है।मधेस मे २०६२ -२०७२ प्रथम मधेस आन्दोलन और वि.स.२०७२ से आजतक का मधेस आन्दोलन मधेसी महिला राजनीतिका गोल्डेन पिरियड माना गया है।
नेपाल का महिलाओं कि उपप्रधानमन्त्री,उपसभामुख उपाध्यक्ष,उपमेयर जैसा उच्च पद दिया गया है।रास्ट्रपति विद्या भण्डारि एक विकल्प है।नेपाल का अन्तरिम संविधान २०६३ मे संविधान सभा कि प्रत्यक्ष चुनाव मे हर राजनीति दल से ३३%महिला उम्मेदवार पेश करने कि व्यवस्था है।लेकिन अनिवार्य चुनाव,राजनीतिक सुरक्षा और सुनिश्चित जैसा बातको कुचल कर संसद बनता है।
अन्तर्राष्ट्रिय कानुन महिला के लिए बना है लेकिन नेपालके लिए नहि है ।प्रजातन्त्र कि शुरुवात से अभि तक श्रोत,साधन और पहुँच वालि महिला हि राजनीति मे आगे है नई विचार और संघर्शशिल महिलाको कोई जगह नहि ।मधेस आन्दोलन मे सक्रिय नेतृ सुनिता साह और सांसद सरिता गिरि जि पर जो राजनीतिक हमला हुवा यह सिर्फ एक उदाहरण है।महिला राजनीति पुरुष समविकास के आसपास हि सिमित है।
नेपाल कि राजनीति जीवन के रणनीति महिलावादि,महिला पुरुष समविकास का एजेन्डा और महिला अधिकार के लिए आवाज बुलन्द करने के लिए संघर्श जैसे ३ तह मे सन्चालन है।स्थानीय सरकार मे जो न्यायिक समिति है उसका संयोजक उपाध्यक्ष एंव उपमेयर होति है ।वो कानुन और कमिशनतन्त्र वालो को इसारा मे काम करना पडता है।मधेसि समाज मे जाति और राजनीति मे पार्टी से जुडे धुर्विकरण बढ रहा है ।मधेसी महिला राजनीति मे नव प्रवेश करने का मतलब Covid -19 से लडने कि चुनौती जैसा होता है।
अन्तमे ,नेपाल कि महिलाका सामाजिक और राजनीतिक जीवन एक हि रास्ता से गुजर रहा है।मधेस मे महिला ज्यादे हि दमन,शोषण और उत्पिडनका सिकार हि रहि है।अगर यह सब सिस्टमको ठिक करना हो तो पितृसत्तात्मक आदर्श के साथ मातृसत्तात्मक आदर्श को भि स्थापना करना होगा।महिलाओं का सामाजिक और राजनीतिक जीवन बदलने के लिए संस्थागत समर्थन,परिवार कि पुरि मददत,लैङ्गिक अध्ययन,परम्परा और अन्धविशवास का अन्त,राजनीतिक पार्टी से प्रोत्साहन जैसा राजनीतिक तय करना पडेगा ।







